बेशक गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अपनी सेहत का अच्छे से ख्याल रखना चाहिए। क्योंकि, उनके साथ- साथ उनके गर्भ में एक और जान पल रही होती है, जिसका जिम्मा उन पर होता है। इसलिए, इस दौरान सही खानपान काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में, बहुत सी महिलाएं अपनी सेहत का अच्छे से ख्याल रखती है और पर्याप्त भोजन भी करती हैं, पर फिर भी उनके शरीर में खून की कमी हो जाती है, जिसके कारण एनीमिया हो जाता है। यह एक गंभीर स्थिति है, जिसे सही खानपान और डॉक्टर द्वारा दिए गए सप्लीमेंट्स की सहायता से ठीक किया जा सकता है। पर, फिर भी गर्भावस्था के दौरान एनीमिया कब खतरनाक होता है इसके बारे में महिलाओं को पता होना आवश्यक होता है? दरअसल, गर्भावस्था के दौरान, काफी ज्यादा थकान महसूस होना, सांस लेने में तकलीफ होना, अचानक से सिर घूमना या फिर चक्कर आना, दिल की धड़कनों का बढ़ना, समय से पहले प्रसव होना, शिशु का वजन कम होना, और महिला की त्वचा का पीला पड़ जाना जैसी स्थितयों में एनीमिया काफी ज्यादा गंभीर साबित हो सकता है। आइये इसके बारे में और विस्तार से जानते हैं।
गर्भावस्था के दौरान एनीमिया को कब गंभीरता से लेना महत्वपूर्ण होता है?
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान एनीमिया जैसी समस्या को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे में, निम्नलिखित लक्षण नजर आते ही आपको इस समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए, जैसे
1. काफी थकान महसूस होना
गर्भावस्था के दौरान, महिलाओं के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों की वजह से शरीर में थकान और कमजोरी होना एक आम बात हो सकती है। पर, अगर गर्भावस्था के दौरान सही खान-पान और अच्छी देखभाल करने के बावजूद भी आपको शरीर में बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी महसूस हो रही है और इसके कारण रोजाना के
कामकाज में दिक्कत महसूस हो रही है, तो इसे नजरअंदाज न करें तुरंत डॉक्टर से मिलें।
2. सांस लेने में तकलीफ होना
अगर गर्भावस्था के दौरान आपको लगातार सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही है, तो यह एनीमिया का संकेत हो सकता है, जो एक महिला की सेहत के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं होता है। दरअसल, एनीमिया के कारण शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर काफी गिर जाता है, जिसके कारण शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती है। शरीर में, ऑक्सीजन की कमी के कारण दिल और लंग्स को काफी मेहनत करनी पड़ती है। इन्ही कारणों की वजह से एनीमिया में महिलाओं को सांस लेने में तकलीफ महसूस होती है।
3. दिल गति का बढ़ना
एनीमिया की समस्या होने पर पीड़ित महिलाओं के दिल की धड़कने बढ़ सकती हैं। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि एनीमिया के कारण शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा पर्याप्त न होने की वजह से शरीर पर काफी ज्यादा दबाव पड़ता है, जिससे दिल की गति बढ़ने लगती है। ऐसे में, महिलाओं को तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
गर्भावस्था के दौरान एनीमिया होने का खतरा सबसे ज्यादा कब होता है?
दरअसल, गर्भावस्था के दौरान, एनीमिया जैसी समस्या का खतरा मल्टीपल प्रेगनेंसी, कम समय के गैप में दो बार गर्भवती होना, उल्टी या मॉर्निंग सिकनेस काफी ज्यादा होना और आयरन युक्त आहार का सेवन न करने जैसी स्थितियों में सबसे ज्यादा होता है।
निष्कर्ष: दरअसल, गर्भावस्था के दौरान एनीमिया की समस्या होना अपने आप में ही एक खतरनाक बीमारी है। काफी थकान, सांस लेने में तकलीफ, सिर घूमना, चक्कर आना और दिल की गति तेज होने पर, एनीमिया काफी गंभीर साबित हो सकता है। इसके कारण न केवल महिला को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है, बल्कि इससे गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास भी रुक जाता है। इसलिए, गर्भवती महिलाओं को इस दौरान अपना ख़ास ध्यान रखने के साथ-साथ अपनी डाइट में आयरन युक्त आहार को जरूर शामिल करना चाहिए। इसके लिए आप हरी पत्तेदार सब्जियां और बीटरूट को अपनी डाइट में शामिल कर सकती हैं। अगर वक्त रहते गर्भवती महिलाएं अपनी सेहत का अच्छे से ध्यान नहीं रखती हैं, तो यह सेहत के लिए ठीक नहीं होता है। इसलिए, एनीमिया की समस्या के लक्षणों की पहचान कर आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। अगर कंसीव करने से पहले ही आपको इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है, तो इसे नजरंअदाज न करें तुरंत डॉक्टर से मिलें। इसके लिए आप अपनी डाइट में सुधार करें। इसके बारे में ज्यादा जानने के लिए और गर्भावस्था से जुड़ी किसी भी समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही द गुड हेल्थ क्लिनिक फॉर वूमेन के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल!
प्रश्न 1. गर्भावस्था के दौरान एनीमिया की किन स्थितियों में अस्पताल जाने में बिल्कुल भी देरी नहीं करनी चाहिए?
ऐसे में, अगर कोई गर्भवती महिला एनीमिया जैसी समस्या से पीड़ित है, तो उसको अपनी सेहत का काफी ज्यादा ध्यान रखना चाहिए और समस्या के लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए। ऐसे में, सांस लेने में तकलीफ होना, काफी चक्कर आना और सिर भारी लगना जैसी स्थितियों में आपको तुरंत अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए।
प्रश्न 2. गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की समस्या कितने दिन तक बनी रह सकती है?
दरअसल, गर्भवती महिलाओं में एनीमिया यानी कि शरीर में खून की कमी की समस्या के दौरान अगर सही इलाज, पोषण और आयरन सप्लीमेंट्स दिए जाएं, तो यह समस्या लगभग 3 से 6 महीने तक रह सकती है और अगर सही समय पर इलाज न किया जाए, तो इस समस्या को ठीक होने में काफी वक्त भी लग सकता है।
प्रश्न 3. प्रेगनेंसी का पता चलते ही महिला को कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?
आम तौर पर, जब किस महिला को पता चले कि वह गर्भवती है, तो उसको पहले महीने से भी पहले डॉक्टर से तुरंत मिलना चाहिए। ऐसे में, महिलाएं गर्भावस्था के पहले 5 से 12 हफ़्तों में डॉक्टर से मुलाकात करने के लिए अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकती हैं। इस दौरान, डॉक्टर गर्भ में पल रहे बच्चे की जांच कर सकते हैं, कि वह ठीक से बढ़ रहा है, या फिर नहीं नहीं।